Friday, October 02, 2020

मैं हूँ ढलती शाम अगर....... तो उस शाम में एक जलता ...दिया... है तू ..... 💝💝 . मैं हूँ इश्क़ सच्चा अगर........ तो मुझमें मौजूद मासूम सी ...दुआ... हैतू...... 💝💝 . मैं हूँ तपती धरती सी जो तो ठंडक पहुंचाता ठंडी ठंडी...हवा ... है तू..... 💝💝 . मैं हूँ ज़ख़्मी मोहब्बत अगर..... तो उसे राहत देता दर्द ए ...दवा... हैतू ..... 💝💝 . तू नहीं तो मैं कुछ भी नहीं, क्योंकि मेरी वज़ूद की रूह में...बसा... है तू…… 💝💝 Talk to me with your lips and I will hear you. But speak to me with your heart and I will listen...forever.

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