Friday, May 07, 2021

A beautiful song by Gulzar ... साहिलों पे बहनेवाले कभी सुना तो होगा कही काग.जों की कश्तियों का कही किनारा होता नही ओ माझी रे, माझी रे कोई किनारा जो किनारे से मिले वो अपना किनारा हैं * * पानीयों में बह रहे हैं , कई किनारे टूटे हुये रासतों में मिल गये हैं सभी सहारे छूटे हुये कोई सहारा मझधारे में मिले जो अपना सहारा है .... https://youtu.be/jX3rfM34uaM

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