Tuesday, November 03, 2020

चाँद तारे, न ये रंगो - बू चाहिए कुछ खिलौने नहीं, मुझको तू चाहिए पत्थरों को तराशा किया उम्र भर तेरे जैसा कोई हू -ब-हू चाहिए वो मददगार हो, या हो दुश्मन मेरा पीठ पीछे नहीं रू - ब- रू चाहिए अब हवाएँ भी रचने लगीं साज़िशें अब चराग़ों को भी कुछ लहू चाहिए वो मिलेगा यक़ीनन मगर शर्त है आखिरी सांस तक जुस्तजू चाहिए - दीक्षित दनकौरी ‿ ☆҉❤☆҉ · ‿ ☆҉❤☆҉ · ! ‿ ☆҉❤☆҉ · ‿ ☆҉❤☆҉ ·

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